EPF Rule Change 2026: अगर एक अगर आप एक कर्मचारी हैं या फिर आपके पास नौकरी पैसा है और आपके पास ईपीएफ अकाउंट है तो यह अपडेट आपके लिए काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि केंद्र सरकार की तरफ से EPF 2026 को लेकर अधिसूचना जारी किया है। नौकरी छूटने के बाद पीएफ निकालने के नियमों में पूरी तरीके से बदलाव हो चुका है। नौकरी छूटने के बाद कर्मचारी 2 महीना बेरोजगार रहने के बाद अपने पीएफ का पैसा ईपीएफ खाते से निकाल पाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। बेरोजगार होने के तुरंत बाद कर्मचारी अपने पीएफ खाते से 75% का राशि निकाल सकेंगे। बाकी 25% बचा हुआ पैसा 12 महीने लगातार बेरोजगार रहने के बाद निकाल पाएंगे। इस नई व्यवस्था को कर्मचारी भविष्य निधि योजना 1952 के जैसे लागू किया जाने वाला है। यह नई व्यवस्था कोड आन सोशल सिक्योरिटी 2020 के तहत लाया गया है।
EPF बदलाव को लेकर सरकार का यह है बड़ा उद्देश्य
सरकार के द्वारा यह कहा गया है कि बदलाव का प्रमुख उद्देश्य कर्मचारियों के रिटायरमेंट के बाद सेविंग्स को सुरक्षित किया जाना है। पहले जो कर्मचारी रिटायर होते थे वह अपने पीएफ का पैसा रिटायरमेंट के बाद पूरा निकाल लेते थे। लेकिन बाद में नई नौकरी मिलने के बावजूद रिटायरमेंट के फंड में ज्यादा बजट नहीं रहा पाता था। जिस वजह से सरकार के द्वारा फैसला लिया गया और खाते में कम से कम 25% का राशि बना रहे और उसे पर ब्याज भी मिलता रहे और लंबी अवधि में यह एक बड़े फंड के रूप में तैयार हो पाए सरकार का यह प्रमुख उद्देश्य है।
EPF के नए नियम से कर्मचारियों को क्या मिल गई राहत?
इस नए नियम के तहत एक राहत प्रदान किया गया है पहले कर्मचारी अपने योगदान का हिस्सा निकाल पाते थे लेकिन अब 75% का निकासी सीमा के तहत कर्मचारियों का योगदान व नियोक्ता का योगदान दोनों पर मिला ब्याज भी सम्मिलित रहेगा। इससे कर्मचारी इस रकम को निकाल पाएंगे। यानी कुछ ऐसे कर्मचारी हैं जिनको शुरुआती दौर में अधिक राशि दी जा सकती है। जिससे कर्मचारियों के बेरोजगारी के दौरान उनकी आर्थिक मदद हो सकेगी देखा जाए तो कर्मचारियों को एक तरह से सरकार ने राहत दिया है।
सरकार ने विड्रोल के नियमों को किया आसान
सरकार के द्वारा पीएफ एडवांस के नियम को काफी आसान बनाया जा चुका है। सबसे पहले अलग-अलग जरूर हेतु तरह-तरह का निकासी की श्रेणी बनाई गई थी। जिसके लिए अलग-अलग शर्त व सेवा अवधि तय किया गया था। अब इसको घटाते हुए तीन मुख्य कैटेगरी में बांट दिया गया है। इसके साथ ही अधिकांश एडवांस निकासी हेतु न्यूनतम 12 महीने का सदस्य का साथ तय किया गया है। पहले कुछ मामलों हेतु 5 वर्ष या 7 वर्ष या उससे अधिक सेवा का आवश्यकता रहता था जिसकी वजह से कर्मचारियों को काफी परेशानी होती थी।
सरकार ने EPF के नियम में इसलिए किया बदलाव
सरकार के द्वारा EPF के नियम में बदलाव की प्रमुख वजह इसलिए हुआ। क्योंकि काफी बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने पूरे पीएफ के पैसे को निकाल रहे थे और तमाम सरकारी आंकड़ों के आधार पर करीब 50% PF खाता में अंतिम निकासी के वक्त ₹20000 की राशि शेष बचती थी या इससे कम बचती थी। जबकि 75% खाते ऐसे थे जहां पर ₹50000 से कम बैलेंस रहता है। जिस वजह से कर्मचारियों को रिटायरमेंट सुरक्षा कमजोर दिख रही थी। सरकार यह पूरी तरीके से चाह रही है कि कर्मचारी काफी लंबी समय तक निवेश का पूरा फायदा उठाएं। कंपाउंडिंग का फायदा भी रिटायरमेंट के बाद बन सके।
EPF राशि निकालने के लिए खास परिस्थितियां
EPF राशि निकालने के लिए कुछ परिस्थितियों भी हैं कर्मचारी अपने EPF की राशि निकालने की अनुमति पहले की तरह रहेगी। जिसमे आयु पर रिटायरमेंट व स्थाई विकलांगता व कार्य करने में असमर्थता वह कंपनी के द्वारा छटनी व शैक्षिक सेवानिवृत्ति और परमानेंट बाहर विदेश में रहने जैसी परिस्थितियों सम्मिलित हैं। अगर किसी कर्मचारी की नौकरी छूटती है तो वह तुरंत पूरा पीएफ का पैसा नहीं निकल पाएगा सिर्फ 75% की राशि उनको मिलेगी। बाकी 25% के लिए 12 महीना तक बेरोजगार रहना पड़ेगा।
EPF इपीएफ स्कीम 2026 कर्मचारियों को बेरोजगारी के दौरान में भी आर्थिक रूप से मदद करना और भविष्य हेतु रिटायरमेंट फंड को पूरी तरीके से सुरक्षित रखना है। अगर किसी कारणवश आप नौकरी बदलना चाहते हैं या फिर बेरोजगार होने की स्थिति में पीएफ के नए नियमों के बारे में समझ लेना जरूरी है। क्योंकि पीएफ निकासी का तरीका पहले से काफी बदल चुका है। पीएफ स्कीम के तहत कर्मचारियों को सरकार ने राहत देने का कार्य किया है। पैसे की निकासी के नियम में बदलाव हो गया है। जिस वजह से रिटायर कर्मचारियों को इस बदलाव को अच्छे से समझ लेना जरूरी है।










