PhD Admission Rule Change 2026: पीएचडी में दाखिला के नियम में बदलाव, स्नातक पास छात्रों को पीएचडी में मिलेगा एडमिशन

Staff Khabar
On: July 8, 2026 1:46 PM
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PhD Admission Rule Change 2026: स्नातक पास छात्रों के लिए अच्छी खबर आ चुकी है। पीएचडी में स्नातक पास छात्रों को एडमिशन मिल सकेगा। बिहार राज्य के स्नातक पास छात्रों को एचडी में एडमिशन किसी सुविधा मिल पाएगी। 7.5 सीजीपीए या इससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को 1 वर्षीय बिना मास्टर डिग्री प्रोग्राम के सीधे पीएचडी में प्रवेश मिल पाएगा। सीधे तौर पर बिहार में स्नातक पास उत्तर छात्रों को पीएचडी में एडमिशन मिल सकेगा। जो कि 7.5 सीजीपीए इससे अधिक अंक प्राप्त करने वालों को यहां सुविधा प्रदान किया जाएगा। बिहार लोक भवन के द्वारा बिहार स्टेट यूनिवर्सिटीज पीएचडी ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशन 2026 को मंजूरी दे दिया गया है। वर्ष 2017 के पुराने पीएचडी के नियम अब समाप्त हो चुके हैं। बिहार राज्य के विश्वविद्यालय में पीएचडी की पढ़ाई बिहार राज्य के नए नियम के आधार पर होगी। 3 वर्षीय स्नातक करने वाले छात्र को दो वर्षीय स्नातक उत्तर या फिर 4 वर्षीय स्नातक के बाद मास्टर डिग्री पूरा कर लेना होगा।

पीएचडी में प्रवेश के लिए इतना वेटेज दिया जाएगा

सामान्य वर्ग हेतु न्यूनतम 55% अंक व आरक्षित वर्गों को यूजीसी के नियम के आधार पर छूट दिया जाएगा। यूजीसी 2022 के मानक के आधार पर नई पीएचडी नियमावली को तैयार किया गया है। बिहार राज्य में नया नियम 4 जुलाई 2026 से प्रभावित हो चुका है। अब राज्य के संबंधित सभी विश्वविद्यालय को नए नियम को अपनाना पड़ेगा। पीएचडी में प्रवेश यूजीसी नेट यूजीसी सीएसआईआर नेट या गेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को दिया जाएगा। प्रवेश हेतु 80% वेज नेट गेट के अंक का दिया जाएगा और 20% वेट साक्षात्कार का दिया जाएगा।

पीएचडी की न्यूनतम व अधिकतम अवधि तय

पीएचडी का न्यूनतम अवधि 3 वर्ष तय किया गया है और अधिकतम अवधि 6 वर्ष तय किया गया है। विशेष परिस्थितियों में 2 वर्ष का अतिरिक्त समय दिए जाने का प्रावधान है। 2 वर्ष की छूट महिला शोधार्थी व 40 फीसदी से अधिक की छूट दिव्यंका वाले शोधार्थियों को दिया जाएगा। पीएचडी के नए नियम के तहत सभी शोधार्थियों को लेखन शिक्षक व शैक्षिक प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है।

परास्नातक से पीएचडी तक की व्यवस्था में बदलाव

बिहार राज्य में परास्नातक से लेकर पीएचडी तक के शैक्षिक व्यवस्था में काफी बड़ा बदलाव हो चुका है। लोग भवन के द्वारा नई व्यवस्था पर मंजूरी दे दी गई है और मुहर लग चुका है। कुलाधिपति सैयद अता हसनैन के द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आधार पर विद्यार्थियों को अधिक गुणवत्तापूर्ण लक्ष्य और शोधनमुख शिक्षा उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से इस शैक्षणिक सुधारो के नए नियम को मंजूरी व स्वीकृति प्रदान कर दिया गया है। जो स्टूडेंट 4 स्नातक की पढ़ाई करेंगे। जिसमें पहले वर्ष की पढ़ाई पूरा कर लेने पर स्नातक का प्रमाण पत्र मिलेगा। दूसरा वर्ष का पूरा कर लेने पर स्नातक डिप्लोमा मिलेगा और तीसरे वर्ष के बाद स्नातक की उपाधि मिलेगी और 4 वर्ष सफलतापूर्वक कोर्स पूरा करने पर आनर्स की डिग्री मिल जाएगी और छठे सेमेस्टर तक 7.5 है उससे अधिक सीजीपीए प्राप्त करने वाले जो छात्र हैं उन्हें चौथे वर्ष में ही ऑनर्स की रिसर्च के विकल्प को चुनने का मौका मिलेगा। जिससे उनके लिए शोध का अवसर और अधिक बढ़ जाएगा।

नए नियम में 3 वर्ष होने पर नहीं मिल पाएंगे शोधार्थी

बिहार में पीएचडी के नए नियम व व्यवस्था के तहत यह प्रावधान कर दिया गया है कि जिन भी शिक्षकों की रिटायरमेंट में 3 वर्ष से काम का वक्त बचा हुआ है वह नए पीएचडी शोधार्थी नहीं ले पाएंगे। बिहार में स्नातक पास छात्रों के लिए यह नया नियम छात्रों के लिए राहत प्रदान करने वाला है। इस नए नियम के तहत छात्र पीएचडी में सीधे प्रवेश के पात्र होंगे।

Ashutosh Singh

Ashutosh Singh is a Content Writer at StaffKhabar.in, He writes on Government Employee News, Education News, Notification, Answer Key And Result Update, Recruitment, UPTET CTET News, and Schemes etc. helping readers stay informed with clear and reliable information.

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